+91-808080-9084

+91-808080-9084

[email protected]

IVF Blog Detail

    Home » Blog » जानिए कैसे और क्या होता हे IVF इलाज़ ?

जानिए कैसे और क्या होता हे IVF इलाज़ ?

जानिए कैसे और क्या होता हे IVF इलाज़?
IVF को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन(in vitro fertilization) कहा जाता है जिसके द्वारा जन्म लेने वाले बच्चे को आम भाषा में test tube baby भी कहा जाता है| यह एक आधुनिक वैज्ञानिक तरीका है, जिसके द्वारा गर्भधारण कराया जा सकता है|

इस तकनीक में महिला के अंडाशय में से अण्डों को बाहर निकाल कर प्रयोगशाला में पुरुष के शुक्राणु के साथ मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है | जिसे हम embryo कहते हैं और उस भ्रूण(embryo)को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है,जिससे कि वो गर्भधारण कर सके |

आज के समय में जब कोई भी दंपत्ति 1साल से भी अधिक लगातार गर्भधारण करने के प्रयास के बाद भी निःसन्तानता से परेशान होता है तो ऐसे दंपत्ति को असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक की सहायता की जरुरत पड़ती है |

IVF क्या है और कैसे होता है उसके बारे में समझने से पहले हमे IVF के बारे में जो गलतधारणाएं हैं उनको दूर करना बहुत जरुरी है |

१-पहली गलत धारणा | निसंतान होने का कारण सिर्फ महिलायें होती है|

जब कोई भी दंपत्ति निःसन्तान होता है तो सिर्फ महिला को ही जिम्मेदार माना जाता है और उसे बाँझ कहा जाता हे, जबकि निसंतान होने का कारण सिर्फ महिला के अंदर कमी होने से नहीं होता इस में पुरुष और महिला दोनों ही बराबर के जिम्मेदार होते हैं | इसलिए कोई भी इलाज़ का निर्णय लेने से पहले पुरुष और महिला दोनों की समान रूप से जांच होनी चाहिए |

२-दूसरी गलत धारणा | IVF तकनीक के द्वारा बच्चे पैदा करने में कष्ट होता है |

IVF बहुत ही आसान और सरल इलाज़ होता है जिसमें कि कोई बड़े ऑपरेशन या भर्ती की आवश्यकता नहीं होती है | IVF के इलाज़ में बस एक कमी मानी जा सकती हे कि इसमें बस इंजेक्शन लगाने का कष्ट होता है क्युंकि अभी तक विज्ञान ने ऐसी कोई दवाई नहीं बनायी जिससे इंजेक्शन का कष्ट बचाया जा सके |

लेकिन डरने की कोई बात नहीं है क्यूंकि इंजेक्शन आजकल बहुत अच्छे pen से लगाये जाते हैं, जिन्हे लगाने में चींटी के काटने के बारे दर्द महसूस होता है |

३ तीसरी गलत धारणा | IVF के इलाज़ में लगातार बिस्तर पर लम्बा आराम चाहिए |

ऐसा बिलकुल नहीं है, IVF करने के बाद एक महिला को बस इतना अपना ध्यान रखना चाहिए जितना कि एक महिला गर्भावस्था में अपना ध्यान रखती है | जैसे कि ज्यादा भारी काम नहीं करना, लम्बे ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर नहीं चलना |

IVF के इलाज की किन दम्पत्तियों को आवश्यकता है ?
डॉक्टर के अनुसार उन्हे IVF के द्वारा इलाज़ की आवश्यकता है जिनमे ये समस्याएं पायी जाती हैं जैसे कि
१-किसी भी दंपत्ति का एक साल लगातार असुरक्षित सम्भोग करने के बावजूद गर्भधारण न हो पाना |
२-महिला की दोनों नलियों का बंद होना |
३-ऐसे दंपत्ति जहाँ पर महिला और पुरुष दोनों की ही सारी जांचे नार्मल हैं पर फिर भी संतान प्राप्ति के सुख से दूर हैं | इसे unexplained infertility अस्पष्टीकृत निसंतानता कहा जाता है |
४- अंडाशय में रसोली होना या फिर endometriosis से ग्रसित होना |
५-कम उम्र में ही अण्डों का ख़त्म होना जिसे PREMATURE OVARIAN FAILURE P.O.F कहा जाता है |
६ –पुरुष में शुक्राणुओं की कमी होना या फिर शुक्राणुओं का समाप्त होना |

जाने IVF की प्रक्रिया कैसे की जाती है |

1- आईवीएफ IVF प्रक्रिया में प्रथम चरण ( OVARIAN STIMULATION)
हर महीने हर एक महिला को अंडेदानी से एक अंडा उत्पन्न होता है| एक आईवीएफ चक्र में, जितने संभव हो उतने परिपक्व अण्डों की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह उपचार की सफलता की संभावना को बढ़ाते हैं। आईवीएफ चक्र के उत्तेजना (STIMULATION) चरण में, अंडाशय में कई अंडे पैदा करने के लिए लगभग 8-12 दिनों के लिए इंजेक्शन वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है । मॉनिटरिंग में ट्रांसवैजिनल अल्ट्रासाउंड TVS होता है, जो अंडे के विकास और गर्भाशय की परत की मोटाई को मापता हैं। हार्मोनल ब्लडटेस्ट किया जाता है जिससे एस्ट्रोजन लेवल की मात्रा पता चलती है रक्त में एस्ट्रोजन का लेवल अंडों की वृद्धि और परिपक्वताका एक और संकेतक होता है|

2- आईवीएफ प्रक्रिया में दूसरा चरण (OPU-OVUM PICK UP)
स्टिमुलेशन के अंत में एक ट्रिगर शॉट दिया जाता है इस चरण में समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ पर अंडों को ओव्यूलेशन के अपेक्षित समय से बस थोड़ा पहले निकाल लेना चाहिए । अण्डों को निकलने में केवल 10- 20 मिनट का समय लगता है ।अल्ट्रासाउंड के जरिये सुई के मार्गदर्शक से अण्डों को निकाल लिया जाता है , और फिर इन्हें एम्ब्र्योलॉजिस्ट ( EMBRYOLOGIST) LAB PERSON को सौंप दिया जाता है | ये सारी प्रक्रिया ANAESTHESIA में की जाती है और बिल्कुल भी दर्द नहीं होता | इस दिन आपको IVF CENTRE में ही भर्ती रहना पड़ता है |

३—आईवीएफ प्रक्रिया में तीसरा चरण |(FERTILIZATION)
अंडे और शुक्राणु एकत्र होने के बाद, भ्रूणविज्ञानटीम (EMBRYOLOGIST TEAM) निषेचन (FERTILIZATION) प्रक्रिया शुरू करती है । निषेचन के दो तरीके हो सकते हैं पारंपरिक निषेचन (CONVENTIONAL IVF ) जिसे इन स्थिति में प्रयोग में लाया जाता है जहाँ पर – बंद फैलोपियन ट्यूब, एंडोमेट्रियोसिस, EGG DONATION , सरोगेसी (SURROGACY) आदि निसंतानता के कारण होते हैं |यहां अंडे और पर्याप्त संख्या में शुक्राणुओं को एक डिश में मिलाया जाता है और निषेचन (FERTILIZATION) के लिए इनक्यूबेटर में छोड़ दिया जाता है ।
निषेचन का दूसरा तरीका होता है -इंट्रासाइटोप्लाज्मिकस्पर्म इंजेक्शन ( ICSI) INTRACYTOPLASMIC SPERM INJECTION:
इसमें एक स्वस्थ शुक्राणु को सुई की मदद से पकड़ा जाता है और निषेचन (FERTILIZATION) सुनिश्चित करने के लिए सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है । ये तकनीक उन दम्पत्तियों के लिए वरदान की तरह है,जो कम शुक्राणु या NIL शुक्राणु को समस्या से जूझ रहे हैं , क्यूँकि इसमें भ्रूण बनाने के लिए केवल उतने ही शुक्राणु चाहिए , जितने कि अंडे हैं (लगभग- 4 -10 )

४ – IVF प्रक्रिया में चौथा चरण | (EMBRYO TRANSFER )
भ्रूणस्थानांतरण (EMBRYOTRANSFER) एक सरल प्रक्रिया है जिसे पूरा होने में लगभग पांच मिनट लगते हैं । इसमें ULTRASOUND के जरिये एम्ब्र्योटांस्फर EMBRYO TRANSFER किया जाता है |एम्ब्र्योटांस्फर की शुरुआत से पहले , दंपत्ति को आईवीएफ विशेषज्ञ के द्वारा उन के अण्डों और शुक्राणु से बने भ्रूण (EMBRYO) की सारी जानकारी दी जाती है |दिन 2/3(DAY 2 /DAY 3)DAY 4 (COMPACTION STAGE) या दिन 5 (DAY 5) (ब्लास्टोसिस्ट) (BLASTOCYST) को ट्रांसफर करने का निर्णय भ्रूण (EMBRYO) के विकास के दिन 2/3 पर भ्रूण (EMBRYO) की संख्या और गुणवत्ता के आधार पर लिया जाता है | साथ ही किसी भी शेष भ्रूण (EMBRYO) की फ्रीजिंग (FREEZING) के बारे में बताया जाता है |

५ – पांचवा एवं अंतिम चरण |
आईवीएफ सफलता की पुष्टि के लिए एम्ब्र्योट्रांसफर EMBRYO TRANSFER के बाद एक ब्लड टेस्ट BETA HCG की जांच 12 वें दिन की जाता है । 5 से अधिक BETA HCG का लेवल पॉजिटिव माना जाता है | हालांकि कई चल रहे गर्भधारण 25 से अधिक के बीटाएचसीजी BETA HCG स्तर के साथ शुरू होते हैं । इस ब्लड टेस्ट को 48 घंटे के बाद फिर से दोहराया जाता है । स्वस्थ गर्भधारण में यह स्तर हर 48 घंटे में दोगुना हो जाता है ।

आईवीएफ के बाद कौन-सी सावधानियां अपनाएं ?

१-पूरे BED REST की आवश्यक्ता नही है
पूरे bed rest की आवश्यकता नहीं है | आप अपना सारा routine घर का काम या office का काम कर सकते हैं |
इस अवधि में आपको अपना पूरा ध्यान रखना चाहिए जैसे किसी भी भारी वस्तु को न उठाएं | अगर आप व्यायाम करते हैं तो कोई भी भारी व्यायाम न करे |

२- स्वस्थखानपानकासेवनकरना |
अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए ,खाने में हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार लेना चाहिए | कोशिश करनी चाहिए कि आप कैफीन युक्त पदार्थ का सेवन न करें |

३- नसीलें पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए |
धूम्रपान और शराब जैसे नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए क्युंकि इनसे गर्भपात होने का खतरा होता है |
इन सबका तात्पर्य यह हे कि ivf के बाद एक महिला को अपना बस इतना ध्यान रखना चाहिए जैसे कि कोई गर्भवती महिला रखती है |

LEAVE A REPLY

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Talk to the best team of fertility experts in the india today for all your pregnancy and fertility-related queries.

Call now +91-808080-9084