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गर्भधारण करने से पहले कौन सी जांचो की जरुरत है ?

यदि आपने एक परिवार शुरू करने का फैसला किया है, तो आप शायद उन तरीकों के बारे में सोच रहे हैं जिनसे आप सामन्य गर्भावस्था और स्वस्थ नवजात शिशु होने की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं |

गर्भाधान से पहले महिला की जांच और कुछ रक्त परिक्षण करने से डॉक्टर को उन परिस्थितियों की पहचान होती है, जिससे उसके स्वास्थ्य पर या उसके विकासशील बच्चे (भ्रूण)(FOETUS) के स्वास्थ्य  पर प्रतिकूल प्रभाव  पड़ सकता है | यह एक महत्त्वपूर्ण पहलू है क्यूंकि अगर समय पर पहचान की जाए तो कई बीमारियों का इलाज़ किया जा सकता है या माँ और बच्चे को भविष्य में होने वाले जोखिम से बचाया जा सकता है|

एक स्वस्थ गर्भवती महिला भी कुछ ऐसी बिमारियों से ग्रसित हो सकती हे, जिनके लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन अगर गर्भाधान से पहले उनका इलाज़ न किया जाये तो गंभीर प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं |

इसलिए किसी भी दंपत्ति  को उनके पारिवारिक इतिहास और चिकित्सा इतिहास के आधार पर जाँचने की आवश्यक्ता होती है | कुछ ऐसी जाँचें होती हैं जो स्वस्थ गर्भावस्था को सुनिश्चित करने में मदद कर सकती हैं |

गर्भावस्था से पहले की कुछ जांचों में रक्त परिक्षण शामिल होता है जिससे डॉक्टर आपको और आपके साथी को यह सुनिश्चित  करते हैं कि आप दोनों किसी भी तरह की बिमारियों  से ग्रसित हैं या नहीं  हैं | इन जांचों के  परिणामों के आधार पर डॉक्टर आपको कुछ व्यायाम ,आहार,जीवनशैली और मल्टीविटामिन के बारे में सलाह देते हैं | डॉक्टर सुरक्षित गर्भावस्था और स्वस्थ बच्चे के लिए धूम्रपान और शराब छोड़ने की सलाह देते हैं |

ये कुछ जांचे हैं जो गर्भाधान से पहले करने की सलाह दी जाती हैं :

1 -ब्लड ग्रुप के बारे में जानकारी होनी चाहिए |

हर महिला को अपने ब्लड ग्रुप को जानने के लिए अपनी रक्त  जांच करवानी चाहिए| (चाहें वह टाइप A,B,ABऔर O हो )जो महिला पहले से  ही अपने  ब्लड ग्रुप को जानती है,उन्हें इस परिक्षण की आवश्यक्ता नहीं होगी  |

यह जानना भी आवश्यक है कि महिला का ब्लड ग्रुप Rh- या  Rh+ है | अगर किसी महिला का Rh- BLOOD GROUP है तो उसके पार्टनर (PARTNER) का ब्लड ग्रुप(BLOOD GROUP ) Rh FACTOR के लिए टेस्ट किया जाता है और अगर पार्टनर (HUSBAND) का ब्लड ग्रुप Rh- है तो उसके भ्रूण(FOETUS) में HAEMOLYTIC DISEASE हो सकती है ,एक गंभीर स्थिति जिससे शिशु की मृत्यु भी हो सकती है | यह स्थिति तब होती है जब Rh-महिला अपने Rh+भ्रूण (FOETUS ) के रक्त के संपर्क में होती है और एंटीबॉडी (ANTIBODY )का उत्पादन शुरू कर देती है,जिससे शरीर rh+_ रक्त को अस्वीकार कर देता है | यह एंटीबाडी (ANTIBODY ) गर्भावस्था के दौरान भ्रूण (FOETUS )को पास होती है ,और Rh+भ्रूण (FOETUS) की रक्त कोशिकाओं को नष्ट  करती है | इस स्थिति को ANTI D INJECTION के शॉट देने  से रोका जा सकता है   |

2-DISEASE TESTING

महिलाओं को कुछ अन्य चिकत्सीय स्थितियों जैसे मधुमेह (DIABETES),उच्च रक्तचाप (HYPERTENSION)आदि के लिए परिक्षण किया जाना चाहिए ताकि बच्चे का नियोजन (PLANNING ) करने से पहले इसका इलाज़ किया जा सके | इन स्थितियों के कारण विभिन्न दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं |

3-THYROID TESTING

थाइरोइड (THYROID)टेस्ट करना बहुत आवश्यक होता है क्यूंकि थाइरोइड लेवल में थोड़े से भी बदलाव

शिशु मस्तिष्क के  विकास को प्रभावित कर सकते हैं | इसलिए जरुरी है कि अगर कोई महिला प्रेगनेंसी प्लान z कर रही है तो उसका  थाइरोइड लेवल नार्मल लेवल से भी कम रखा जाये |

4-VACCINATION

गर्भावस्था के दौरान अगर एक महिला को RUBELLA या CHICKENBOXहो जाता है तो इसका गंभीर प्रभाव हो सकता है जैसे कि गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म होना, एवं बच्चे को कई प्रकार के विकार होना |

इसलिए यह जरुरी होता है कि आप IMMUNITY के लिए जांच करवायें और यदि आवश्यक हो, तो गर्भधारण करने से पहले टीका लगवा लें | ये दोनों VACCINE LIVE VIRUS VACCINE  होती हैं इसलिए टीका लगवाने के बाद यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि LIVE VACCINE के बाद कम से कम एक महीने तक गर्भधारण का प्रयास नहीं कर सकते |

5-INFECTION SCREENING

महिलाओं के लिए निम्न्न INFECTION के लिए परिक्षण किये जाने चाहिए –

HIV,HEPATITIS B ,HEPATITIS C,OR SYPHILLIS (VDRL)

बहुत बार आपको पता भी नहीं होता कि आपको ये बीमारी हैं जो की गर्भावस्था और अजन्मे बच्चे को भी प्रभावित कर सकती हैं | इनके प्रारंभिक निदान और उपचार से माँ से बच्चे के संचरण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है |

6- HPLC -THALASSEMIA TESTING

थैलासीमिया (THALASSEMIA )एक रक्त विकार है जो परिवारों (विरासत में मिला )से गुजरता है जिसमें शरीर हीमोग्लोबिन (HAEMOGLOBIN )(लाल रक्त कोशिका में एक प्रोटीन जो हमारे शरीर के बाकि हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचता है ) यह  ANAEMIA का कारण बन सकता है और स्वास्थ्य के ऊपर गंभीर असर पद सकता है | यह माता पिता से बच्चों तक उनके GENES के माध्यम से पहुँचता है | यदि दंपत्ति में से कोई भी THALASSEMIA GENE का CARRIER है, तो दोनों (HUSBAND AND WIFE )को THALASSEMIA GENE के लिए जाँचा जाता है और यदि दोनों (HUSBAND AND WIFE) THALASSEMIA GENE POSITIVE हैं, तो बच्चों को MAJOR THALASSEMIA हो सकता है|

मेजर थैलासीमिया एक घातक बीमारी है जिसमें जान बचाने के लिए बार बार खून चढ़ाना पड़ता है और उसके बाद भी २०-३० साल की उम्र तक ही LIFE होती है | इस स्थिति में गर्भधारण करने का तरीका बिल्कुल  बदल जाता है | गर्भावस्था से पहले परिक्षण करवाने से आपको और आपके साथी को आपके बच्चे के जोखिम का पता लगाने में मदद मिल सकती है और एक मेजर थैलासीमिया के बच्चे के जन्म से बचा जा सकता है |

PREGNANCY प्लान करने से पहले, अगर आप इन जांचों को करवा लेते हैं, तो बहुत सी परेशानियों से बच सकते हैं | स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है | अपने एवं आने वाले बच्चे के स्वास्थय का ध्यान रखिये |

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